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धुमकुड़िया महबा उल्ला (धुमकुड़िया गौरव दिवस) सम्पन्न

दिनांक 05/02/2023 दिन  रविवार को थाना सिसई, जिला गुमला के ग्राम सैंदा में धुमकुड़िया महबा उल्ला (दिवस) का आयोजन किया गया। इस आयोजन में गाँव के देबीगुड़ी (देवी मां) में छोटे छोटे  बालक बलिकाओं को विधिवत पूजा अर्चना करा कर धुमकुड़िया में प्रवेश दिलाया गया। वहीं शादी का रिश्ता तय हुआ लड़का श्री ऋषभ उरांव को धुमकुड़िया से बिदाई किया गया, जो वर्तमान में इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं । इस अवसर पर कानून विषय के असिस्टेंट प्रोफेसर, ला युनिवर्सिटी, रांची के श्री रामचंद्र उरांव ने कहा कि - धुमकुड़िया, हमारे कुँड़ुख समाज का पहला स्कूल का केंद्र है। उन्होंने कहा कि आदि काल से ही कुँड़ुख समाज के लोग धुमकुड़िया के माध्यम से समाज के लोगों को अच्छे जीवन जीने के लिए विभिन्न प्रकार की शिक्षा देते थे। आज के समय में हमारे समाज के सभी गाँव में धुमकुड़िया केंद्र खोलने की जरूरत है।

Dhumkuria Diwas

वहीं पर बाहर आये अतिथियों में से पूर्व मंत्री श्रीमती गीताश्री उरांव स्वागत करने वाले गांव वालों के साथ देवी मड़ई स्थान तक पहुंच कर सामुहिक पूजा में शामिल होने के बाद बच्चों को आशीर्वाद देकर वापस हुईं। इस धुमकुड़िया महबा उल्ला (दिवस) में उपस्थित तोलोंग सिकि ( लिपि)  के निर्माता तथा सैन्दा गांव निवासी डा नारायण उरांव ने कहा कि आज के दौर में सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू किया जा रहा है। इसके पाठ्यक्रम मैं हिन्दी, अंग्रेजी एवं मातृभाषा शिक्षा है। इसके अनुसार हमारे समाज के लोगों को अपनी भाषा संस्कृति की शिक्षा धुमकुड़िया के द्वारा ही संभव है, क्योंकि 4 से 6 वर्ष के बच्चों को आंगनवाड़ी केंद्र में जोड़ने से बच्चों के लिए कई बातों में कठिनाई होगी। क्योकि आंगनवाड़ी में बहुत से ऐसे क्षेत्र हैं, जहां कुँड़ुख भाषा या लिपि नहीं जानते हैं। इस लिए प्रत्येक गाँव में पारंपरिक धुमकुड़िया केंद्र खोलने की जरूरत है। इस अवसर पर विभिन्न कुँड़ुख भाषा लिपि शिक्षण सेंटर के शिक्षकों के बीच  कुँड़ुख टाईम्स के अंक 4 के बिसुसेंदरा विशेषांक और अंक 05 के धुमकुड़िया विशेषांक, चिंचो डण्डी अरा ख़ी:री पुस्तक का वितरण किया गया। इस आयोजन में सैन्दा गांव बेटी डा. श्रीमती बैजयंती उरांव, गृह विज्ञान में में उच्च शिक्षा अर्थात पी.एच.डी. प्राप्त हैं और वर्तमान में उच्च विद्यालय में में शिक्षिका हैं ने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत विद्यालयों में मातृभाषा को प्राथमिकता दी जा रही है। इसलिए धुमकुड़िया में भाषा-लिपि का पठन-पाठन बच्चों के लिए बेहतरीन अवसर है। कार्यक्रम के अंत में सभी सामुहिक भोजन में शामिल हुए।

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धुमकुड़िया  सैन्दा सुसर संगोठ के संचालक सदस्य श्री उमेश उरांव, पाथो उरांव, घखुल उरांव, जुगेश पहान, श्रीमती झेबा उरांव, मंगरा उरांव, श्री जुगेशवर उरांव को अद्दी अखड़ा की ओर से आदिवासी गमछा देकर सम्मानित किया गया। इस धुमकुड़िया गौरव दिवस में पड़हा कोटवार श्री गजेंद्र उरांव, सेवा निवृत्त शिक्षक श्री धुमा उरांव एवं सैन्दा गांव के बच्चे बच्चियां तथा बुजुर्ग उपस्थित थे।

रिपोर्टर  - सुकरू उरांव, शिबनाथपुर सिसई, गुमला।
 

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