KurukhTimes.com

Current Affairs

News & Events / सामयिकी 

जमशेदपुर में कुंड़ुख़ भाषा तोलोंग सिकि प्रशिक्षण शिविर संपन्‍न

दिनांक 27.09.2021 से तीन दिवसीय कुंड़ुख़ भाषा तोलोंग सिकि प्रशिक्षण शिविर, ट्रार्इबल कल्चशर सेन्टर, सोनारी, जमशेदपुर में सम्पंन्न हुआ। यह आयोजन, टाटा स्टील फाउन्डेशन, जमशेदपुर तथा सहयोगी संस्थान अददी कुंड़ुख़ चाला धुमकु‍ड़ि‍या पड़हा अखड़ा, रांची एवं उरांव सरना समिति, चक्रधरपुर, प.

जंतर मंतर में अलग आदिवासी धर्मकोड के लिए धरना प्रदर्शन संपन्‍न

दिल्ली, जंतर मंतर: 2021 की जनगणना में आदिवासियों के द्वारा अलग धर्म के कॉलम की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना-प्रदर्शन किया गया। जिसमें राष्ट्रीय आदिवासी इंडीजीनस धर्म समन्वय समिति भारत के तत्वधान में भारत वर्ष के तमाम राज्यों व परदेशों से समस्त आदिवासियों ने शिरकत किया और केंद्र सरकार से मांग की गई की 2021 के जनगणना प्रपत्र में आदिवासियों को सेपरेट कॉलम ट्राईबल और आठवीं अनुसूची में मुंडारी गोंडी हो और कुरुख भाषा को शामिल करने की मांग की गई जिसे लेकर माननीय राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, गृह मंत्री एवं रजिस्टर ऑफ जनरल को ज्ञापन सौंपी गई ।

5वीं अनुसूची क्रियान्‍वयन को लेकर रांची हाईकोर्ट के सामने पत्‍थलगड़ी करने जुटे आदिवासी

रांची (झारखंड): पांचवीं अनुसूचित क्षेत्रों में संविधान सम्‍मत क्रियांवयन करने की मांग को लेकर रांची, खूंटी व गुमला से आये करीब साढ़े तीन हजार आदिवासियों ने यहां डोरंडा स्थित हाईकोर्ट के सामने पत्‍थलगड़ी करने पर अड़ गये। उनकी घंटों प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों के बहस चली। आंदोलनकारी आदिवासी मांग कर रहे थे कि संविधान के अनुरूप झारखंड के पांचवी अनुसूची क्षेत्र में शासन प्रशासन स्‍थानीय आदिवासियों के हाथ में देना होगा। आंदोलनकारी अपने साथ शिलापट भी लाये थे जिसमें संविधान में पांचवीं अनुसूची की चर्चा का उल्‍लेख था। पुलिस और प्रशासन के घंटों समझाने के बाद आंदोलनकारियों ने कहा कि मंगलवार (23 फरबरी

लॉकडाउन समाप्ति के बाद अब 11 राज्यों में भूख की समस्या, आदिवासी-कमजोर वर्ग शिकंजे में : हंगर वॉच सर्वे

नई दिल्ली: कोविड-19 महामारी के चलते लगाए गए देशव्यापी लॉकडाउन के खत्म होने के पांच महीने बाद भी गरीबों और समाज के हाशिए पर रहने वाले लोगों के बीच भुखमरी की समस्या गंभीर बनी हुई है। भोजन का अधिकार अभियान द्वारा कुछ गैर-सरकारी संगठनों के साथ प्रकाशित ‘हंगर वॉच’ रिपोर्ट के मुताबिक देश के कम से कम 11 राज्यों के लोगों को इस संकट का सामना करना पड़ रहा है।

ये सर्वे सितंबर और अक्टूबर, 2020 के बीच कराया गया था और इसमें 3,994 लोग शामिल हुए थे। इसमें से ज्यादातर लोगों की सैलरी 7,000 रुपये प्रति महीने से कम थी।

हिंदू धर्म के 16 संस्‍कारों की परंपरा का पालन आदिवासी भी करते हैं फिर सरना धर्म कोड क्‍यों? admin Fri, 11/26/2021 - 20:50

रांची: आदिवासी नेता डॉ करमा उरावं के बयान पर हमलावर विश्‍व हिंदू परिषद (विहिप) व सहयोगी संस्‍थाओं ने सरना धर्म कोड की मांग के खिलाफ मोर्चा खोला है। उनका कहना है कि आदिवासी या जनजातीय समाज को अलग धर्म कोड की कोई आवश्‍यक्‍ता ही नहीं। वे तो हिंदू हैं। 'सरना' केवल पूजा स्‍थल को कहा जाता है, धर्म कैसे हो सकता है?

झारखण्ड में नई शिक्षा नीति और कुंड़ुख़ भाषा-लिपि की सार्थकता विषयक गोष्ठी

दिनांक 21.11.2021 दिन रविवार को अद्दी कुंड़ुख़ चाला धुमकुड़िया पड़हा अखड़ा (अद्दी अखड़ा), रांची (झारखण्ड) के अध्यक्ष जिता उरांव एवं सचिव  राजेन्द्र भगत की मुलाकात राजी पड़हा प्रार्थना सभा ट्रस्ट, मुड़मा, रांची के अध्यक्ष  बंधन तिग्गा से हुई। इस अवसर पर राउरकेला (ओड़िशा) से  मनीलाल केरकेट्टा एवं जामताड़ा (झारखण्ड) से  संजय पहान एवं उनके साथी भी उपस्थित थे।

कुँड़ुख़ तोलोंग सिकि (लिपि) पर उठते सवाल : एक परिचर्चा

जैसा कि हम सभी को जानते हैं कि – कुँड़ुख़ भाषा की लिपि, तोलोंग सिकि है। झारखण्ड सरकार द्वारा इस लिपि को वर्ष 2003 में कुंड़ुख़ भाषा की लिपि स्वीकार करते हुए केन्द्र सरकार को अनुसंशित किया गया है। साथ ही प.

संविधान प्रदत्‍त पारंपरिक स्‍वशासन व्‍यवस्‍था लागू करने के लिए संघर्ष करेंगे आदिवासी

दिनांक 07/11/2021 दिन रविवार को जिला रांची के बेड़ो प्रखण्ड क्षेत्र के ग्राम बारिडीह के  पड़हा भवन प्रांगण में 5वी अनुसूची के अंतर्गत परम्पारिक रुढ़ीप्रथा स्वशासन व्‍यवस्था' को चलाने संबंधी नियमों का प्रस्ताव पारित कर झारखंड के राज्यपाल को दी जाने वाले विषयों को लिखित रुप पर चर्चा किया गया। जिसमें राजी बेल श्रीमान बागी लकड़ा, राजी पड़हा, भारत अपने पड़हा की ओर से लिखित रुप में बैठक को प्रस्तावना दिया। 

‘उरांव लोक साहित्य’ और ‘पुरखर गही खीरी’ पुस्‍तकों का विमोचन संपन्‍न

दिनांक 7 नवंबर 2021 को कुरुख (उरांव) साहित्य अकादमी‚ रांची के तत्वाधान में आदिवासी कॉलेज छात्रावास करम टोली‚ रांची के पुस्तकालय भवन में डॉ. तेतरू उरांव द्वारा लिखित ‘उरांव लोक साहित्य’ तथा डॉ. मासातो कोबायशी (टोक्यो युनिवर्सिटी, जापान) एवं डॉ.

'वैश्विक औद्योगिकरण से आदिवासियों-मूलवासियों की भाषा-संस्कृति का क्षरण हुआ है'

दिनांक 26.10.2021 दिन मंगलवार को ग्रामगुरू रांची के सभागार डॉ. कामिल बुल्के पथ (पुरूलिया रोड रांची) में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अन्तर्गत झारखण्ड की नई शिक्षा नीति के विषय पर एक विचार गोष्ठी सम्पन्न हुई। इस विचार गोष्ठी में झारखण्ड क्रिसचियन्स माइनोरिटी एजूकेशन एसोशिएशन के माननीय अध्यक्ष‚ बिशप भिन्सेन्ट बरवा (सिमडेगा धर्मप्रांत‚ झारखण्ड)‚ महासचिव फा. एरेनियुस मिंज‚ माननीय सदस्य श्री शाण्डिल जी‚ सिस्टर सेलिन बड़ा (प्रधानाध्यापिका संत अन्ना‚ रांची)‚ सी.बी.सी.आई नई दिल्ली के सदस्य फादर डा. निकोलस बरला एवं अखिल भारतीय कुंड़ुख़ कत्थ तोलोंग सिकि प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष फा.