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तोलोंग सिकि सिखाने की एक कला यह भी..

यह विडियो ऐतिहासिक पड़हा जतरा स्थल,मुड़मा, रांची में दिनांक १२मार्च से १४ मार्च २०२२ तक आयोजित कार्यशाला में कुंड़ुख़ भाषा एवं तोलोंग सिकि पढ़ने-पढ़ाने के तरीके को कविता के माध्यम से बतलाते हुए श्रीमती गीता उरांव..

त्रिपुरा में प्रथम आदिवासी महासभा का सम्मेलन संपन्न

दिनांक 28.11.2021 दिन रविवार को त्रिपुरा (भारत) में निवास करने वाले उरांव, मुण्डा, संताल आदि बहुत से आदिवासी छात्रों द्वारा प्रथम आदिवासी महासभा का सम्मेलन किया गया। इस सम्मेालन में भारत सरकार के कैबिनेट मंत्री आदिवासी कार्य मंत्रालय अर्जून मुण्डा, पूर्व कुलपति (डी.एस.पी. मुखर्जी विश्वीविदयालय, रांची) डॉ. सत्य  नारायण मुण्डा, त्रि‍पुरा के आदिवासी कल्याथण मंत्री तथा माननीय विधायक गण एवं अनेक प्रबुद्ध समाजसेवी उपस्थित थे। 

टाटा द्वारा संचालित कुंड़ुख भाषा की कक्षाएं | Classes of Kunrukh language by Tata Steel

टाटा स्टील फाउण्डेलशन‚ जमशेदपुर के सहयोग से कुंड़ुख़ भाषा शिक्षण कार्य : भाषा बचाने की दिशा में स्वागत योग्य कदम || टाटा स्टील फाउण्डेशन‚ जमशेदपुर के सहयोग से आदिवासी उरांव समाज समिति‚ बिरसा नगर‚ जमशेदपुर में कुंड़ुख़ भाषा शिक्षण कार्य किया जा रहा है। इस कार्य का शुभारंभ दिनांक 26.08.2021 को हुआ। यह भाषा शिक्षण कार्य शनिवार को 5 से 7 बजे संध्या तथा रविवार को 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक एवं बुधवार को 5 से 7 बजे संध्या संचालित किया जाता है। भाषा शिक्षण के इस कार्य में केजी से पीजी तक के छात्र शामिल होते हैं। लौह नगरी जमशेदपुर जैसे औद्योगिक शहर में उरांव लोगों की कुडुख भाषा बची हुई है तथा इसे बचाते ह

डॉ नारायण उरावं को सम्‍मानित किया झारखंड सरकार ने

झारखंडी साहित्‍य एवं संस्‍कृति की उपादेयता तथा राष्‍ट्र के विकास में योगदान विषयक दो दिवसीय संगोष्‍ठी सह सांस्‍कृतिक कार्यक्रम के प्रथम दिवस दिनांक 14 नवंबर 2021 को डॉ नारायण उरावं का संबोधन। इस अवसर पर विभाग द्वारा डॉ उरावं को कुरूख भाषा की लिपि तोलोंग सिकि विकसित करने के लिये खास तौर पर सम्‍मानित भी किया गया। 

झारखंड राज्‍य संग्रहालय (पर्यटन कला संस्‍कृति खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग झारखंड सरकार द्वारा 14 नवंबर 2021 को आयोजित कार्यक्रम की झलकी.. 

क्‍यों विलुप्‍त हो रही आदिवासियों की भाषा-संस्‍कृति?

क्‍यों विलुप्‍त हो रही आदिवासियों की भाषा-संस्‍कृति?

अधिवक्‍ता निकोलस बारला और पत्रकार किसलय की बातचीत..

करम राजा (करम देव) की श्रद्धापूर्ण विदाई

यह विडियो ग्राम सैन्दा, थाना सिसई, जिला गुमला के करमा त्योहार का दूसरा दिवस, दिनांक 18-09-2021 दिन शनिवार का है। ग्राम सैन्दा में करमा त्योहार के पहले दिन‚ देर शाम में युवक-युवतियाँ उपवास कर श्रद्धा पूर्वक गाँव के करम पेड़ की तीन डालियां काट कर लाते हैं। करम डाली लाने हेतु उपवास किये हुए लड़के विधि पूर्वक काटकर कुछ दूर तक लाते हैं, फिर बीच रास्ते में ही लड़कों द्वारा उपवास की हुई लड़कियों को सौंपा जाता है। फिर नाचते गाते हुए करम डाली को पहान के घर पहुंचाया जाता है। इन डालियों को पहान द्वारा श्रद्धा पूवर्क अपने घर के छप्पर पर रखा जाता है। फिर देर रात मुर्गा के प्रथम बांग के बाद पहान द्वारा करम क

झारखंड के सैन्‍दा गांव में 'करमा बासी' (करमा) त्‍योहार संपन्‍न

यह विडियो ग्राम सैन्दार‚ थाना सिसई‚ जिला गुमला के ‘‘करमा बासी'' अर्थात करमा त्योहार का दूसरा दिवस‚ दिनांक 18-09-2021 दिन शनिवार का है। ग्राम सैन्दा में करमा त्योहार के पहले दिन‚ देर शाम में युवक-युवतियाँ उपवास कर श्रद्धा पूर्वक गाँव का करम पेड़ का तीन डाली काट कर लाते हैं। करम डाली लाने हेतु उपवास किये हुए लड़के विधि पूर्वक काटकर कुछ दूर तक लाते हैं, फिर बीच रास्ते में ही लड़कों द्वारा उपवास की हुई लड़कियों को सौंपा जाता है। फिर नाचते गाते हुए करम डाली को पहान के घर पहुंचाया जाता है। इन डालियों को पहान श्रद्धा पूवर्क अपने घर के छप्पर में रखता है। फिर देर रात मुर्गा के प्रथम बांग के बाद पहान द्व

कुँड़ुख़ गीत करम राग

प्रस्तुत कुँड़ुख़ गीत करम राग में ग्राम - जगदा, पोस्ट - झिरपाणी, राउरकेला-42 जिला – सुंदरगढ़, ओडिशा निवासी कुमारी सुमरी तिरकी द्वारा गाया गया है। 
मांदर बजाने वाले ग्राम लाठिकाटा जिला - सुंदरगढ़, ओडि‍शा के श्री दशरथ उरांव हैं तथा झुमका बजाने वाले ग्राम - जगदा, पोस्ट – झिरपाणी के श्री बांदे एक्का  हैं। यह गीत झारखण्डर के गुमला–लोहरदगा क्षेत्र के उरांव लोगों द्वारा गाये जाने वाले गीत के जैसा ही है, परन्तुु राग एवं मांदर का ताल में थोड़ा–थोड़ा फर्क है।   
प्रस्तुतत है कुँड़ुख़ गीत करम राग में –

कुँड़ुख़ गीत आसारी राग

प्रस्तुत कुँड़ुख़ गीत आसारी राग में ग्राम - जगदा, पोस्ट - झिरपाणी, राउरकेला-42 जिला – सुंदरगढ़, ओडिशा निवासी कुमारी सुमरी तिरकी द्वारा गाया गया है। मांदर बजाने वाले ग्राम लाठिकाटा जिला - सुंदरगढ़, ओडि‍शा के दशरथ उरांव हैं तथा झुमका बजाने वाले ग्राम - जगदा, पोस्ट – झिरपाणी के श्री बांदे एक्का हैं। यह गीत झारखण्डर के गुमला–लोहरदगा क्षेत्र के उरांव लोगों द्वारा गाये जाने वाले गीत के जैसा ही है, परन्तुु राग एवं मांदर का ताल में थोड़ा–थोड़ा फर्क है। प्रस्तुतत है कुँड़ुख़ गीत करम राग में – रिपोर्टर – अरविन्द उरांव, ग्राम – आताकोरा थाना – भरनो, जिला – गुमला, झारखण्ड । वि‍डियो रिकॉडिंग – श्री बिरवा उरांव