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कुडुख़ भाषा‚ संस्कृति एवं सिकि के संरक्षण हेतु प्रशिक्षण शिविर सम्पन्न

भण्डारा : सात पड़हा कुडुख़ विद्यालय‚ पलमी‚ भण्डारा‚ लोहरदगा में दिनांक 30/10/2021 दिन शनिवार को श्री शनिचरवा उरांव सात पड़हा पलमी के देवान की अध्यक्षता में कुडुख़ भाषा संस्कृति, तोलोंग सिकि के विकास, संरक्षण एवं सात पड़हा कुडुख़ विद्यालय‚ पलमी को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए तथा समाज के सर्वांगीण विकास के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में कुडुख़ भाषा संस्कृति एवं तोलोंग सिकि के विकास एवं संरक्षण के लिए गाँव में धुमकुड़िया को फिर से संचालित करने के लिए गहन विचार विमर्श हुआ| शनिचरवा उरांव ने कहा कि धुमकुड़िया को फिर से जगाने के लिए गाँव के सभ

रू‍ढ़ि‍गत पारंपरिक सामाजिक एवं न्यांयिक संगठन‚ राजी पड़हा की राज्‍य इकाई ‘पादा पड़हा छत्तीसगढ़’ का पुनर्गठन

राजी पड़हा, भारत के तत्वाधान में बलरामपुर जिला के स्थान नई रोहतासगढ़ वीर भूमि सरना शक्ति पाठ परसापानी में ‘पादा पड़हा छत्तीसगढ़’ का पुनर्गठन दिनांक 10.10.2021 दिन रविवार को राजी बेल श्री बागी लकड़ा की अध्यक्षता में सम्पन्नि हुआ। इस बैठक में पड़हा संविधान के अनुसार राजी दीवान श्री फौदा उरांव के द्वारा निम्नलिखित व्यक्तियों को मनोनयन किया गया जो निम्न प्रकार है –

Raji Parha

करम राजा (करम देव) की श्रद्धापूर्ण विदाई

यह विडियो ग्राम सैन्दा, थाना सिसई, जिला गुमला के करमा त्योहार का दूसरा दिवस, दिनांक 18-09-2021 दिन शनिवार का है। ग्राम सैन्दा में करमा त्योहार के पहले दिन‚ देर शाम में युवक-युवतियाँ उपवास कर श्रद्धा पूर्वक गाँव के करम पेड़ की तीन डालियां काट कर लाते हैं। करम डाली लाने हेतु उपवास किये हुए लड़के विधि पूर्वक काटकर कुछ दूर तक लाते हैं, फिर बीच रास्ते में ही लड़कों द्वारा उपवास की हुई लड़कियों को सौंपा जाता है। फिर नाचते गाते हुए करम डाली को पहान के घर पहुंचाया जाता है। इन डालियों को पहान द्वारा श्रद्धा पूवर्क अपने घर के छप्पर पर रखा जाता है। फिर देर रात मुर्गा के प्रथम बांग के बाद पहान द्वारा करम क

झारखंड के सैन्‍दा गांव में 'करमा बासी' (करमा) त्‍योहार संपन्‍न

यह विडियो ग्राम सैन्दार‚ थाना सिसई‚ जिला गुमला के ‘‘करमा बासी'' अर्थात करमा त्योहार का दूसरा दिवस‚ दिनांक 18-09-2021 दिन शनिवार का है। ग्राम सैन्दा में करमा त्योहार के पहले दिन‚ देर शाम में युवक-युवतियाँ उपवास कर श्रद्धा पूर्वक गाँव का करम पेड़ का तीन डाली काट कर लाते हैं। करम डाली लाने हेतु उपवास किये हुए लड़के विधि पूर्वक काटकर कुछ दूर तक लाते हैं, फिर बीच रास्ते में ही लड़कों द्वारा उपवास की हुई लड़कियों को सौंपा जाता है। फिर नाचते गाते हुए करम डाली को पहान के घर पहुंचाया जाता है। इन डालियों को पहान श्रद्धा पूवर्क अपने घर के छप्पर में रखता है। फिर देर रात मुर्गा के प्रथम बांग के बाद पहान द्व

आदिवासी कुंड़ुख़ विद्यालय, मंगलो, सिसई में करम पूर्व संध्या

दिनांक 15.09.2021 दिन बुधवार को कार्तिक उरांव आदिवासी कुंड़ुख़ विद्यालय, मंगलो, सिसई, गुमला में प्रांगन में स्कूगल के छात्र, शिक्षक एवं अभिदभवकों द्वारा संयुक्त  रूप से करम पूर्व संध्या  मनाया गया। इस अवसर पर सिसई प्रखण्ड् के प्रमुख सहित गांव के नवजवानों ने भी हिस्सा  लिया और हिन्दीू, अंगरेजी तथा कुंड़ुख़ भाषा माध्य म के संचालित विद्यालय के संचालकों एवं छात्र–छात्राओं का मनोबल उंचा करने में मददगार बने। आपसी सहयोग से मनाया गया यह करम पूर्व संध्यार गांव समाज में खाशकर बच्चोंस के लिए यादगार रहा।

कुंड़ुख़ मोबाईल एप्पस का निर्माण एवं लोकार्पण

कहा जाता है वर्तमान भूमण्डलीकरण के दौर में विकसित भाषा–संस्कृति के सामने विकासशील भाषा–संस्कृति को चौतरफा संघर्ष करना पड़ता है। ऐसी परिस्थिति में यदि विकासशील भाषा–संस्कृति को बचाये रखने तथा अगली पीढ़ी तक पंहूचाने के लिए सामयिक व्यवहारिक तकनीक का उपयोग करना चाहिए। उन तकनीक में से आज के दौर में वैसा तकनीक जो हरेक घर में पहूंच चुका है तथा प्रत्येंक छात्र–छात्राओं के बीच पहूंचा हुआ है – वह है मोबाईल। अतएव संघर्षशील भाषा को मोबाईल तक पंहूचना एवं पंहूचाना पड़ेगा।

महिलाओं को बैशाखी नहीं समाज का स्तंम्भ समझें

आदिवासी मातृशक्ति अपने बच्चे को अपना 'दूध' नहीं बल्कि अपना  'रक्त' का स्तन पान करवाती है ताकि खून में उबाल रहे यही उबाल समाज के प्रति जुनून पैदा कर बिरसा बनाती हैं। झारखंड की मातृशक्ति का कोख इतनी शक्तिशाली है कि हर सदी में एक जननायक पैदा की हैं।

आज मेरे मातृशक्ति को ये अह्वान है कि आज फिर तुम एक जननायक की जननी बनो ताकि जो हमारे पुर्वजों की विरासत को गिद्ध की तरह नोंच रहे हैं उसना खात्मा हो सके।

उरांव आदिवासियों का परम्पारागत सामाजिक एवं न्यायिक संगठन ‘‘राजी पड़हा, भारत’’ के नये पदाधिकारी

दिनांक 05/09/2021 दिन रविवार को उरांव आदिवासियों की परम्पारागत सामाजिक एवं न्या9यिक संगठन ‘‘राजी पड़हा, भारत’’ का बैठक आमंत्रण सूचना में दिये गये स्थान - गुमला एरोड्रम के निकट आदिवासी संस्कृति भवन में नहीं हो कर गुमला डुमर टोली मैदान में हुआ। इस बैठक में राजी पड़हा, पादा पड़हा, झारखंड और पादा पड़हा, छत्तीसगढ़ का पूर्ण कमिटि का चयन के लिए बैठक हुआ। इस कमिटि चयन बैठक में सर्व सहमति से अलग–अलग पड़हा संविधान के अनुसार कमिटि का चयन निम्नब प्रकार हुआ – (1) राजी पड़हा, भारत का राजी बेल – श्रीमान बागी लकड़ा (2) राजी देवान – श्रीमान फौदा उरांव, गुमला  (3) राजी पड़हा उप देवान – श्रीमान कृपा शंकर भगत,

जातीय जनगणना व राज्‍य की स्‍थानीय नीति पर सरकार की उपेक्षा को लेकर संगठनों की चिंता

झारखंड नामधारी संगठनों ने बुधवार को एक विशेष बैठक में जातीय जनगणना व राज्‍य की स्‍थानीय नीति पर चिंता जाहिर करते हुए सरकार से अविलंब क्रियांवयन की मांग की है। झारखंड आदिवासी संयुक्त मोर्चा एवं आदिवासी छात्र संघ केन्द्रीय समिति की पहल पर विभिन्न आदिवासी एवं मूलवासी समाजिक संगठनों का संयुक्त स्वरूप में विशेष बैठक प्रेस क्लब रांची में संपन्‍न हुआ। बैठक में जातीय जनगणना एवं स्थानीय नीति पर चर्चा हुई। विशेष बैठक की अध्यक्षता डां करमा उरांव ने कि और विषयवस्तु को विस्तार से रखा, वही संचालन अंतु तिर्की ने की एवं प्रतिनिधियों का स्वागत सुशील उरांव द्वारा किया गया और धन्यवाद ज्ञापन बलकू उरांव ने की।

परम्परागत आदिवासी मौसम पूर्वानुमान का प्रथम चरण सही 

गुमला जिला‚ सिसई थाना क्षेत्र के सैन्दा गांव निवासी श्री गजेन्द्र उराँव (65 वर्ष) एवं सियांग गांव निवासी श्री बुधराम उराँव (70 वर्ष) द्वारा मई महीने में वर्ष 2021 के लिए अपने क्षेत्र के आसपास मौसम के बारे में मौसम पूर्वानुमान किया गया था जो प्रथम चरण में सही साबित हुआ। पूर्वानुमान कर्ता द्वय द्वारा कहा गया था कि - इस वर्ष 2021 में रथ या़त्रा से करमा तक अपने क्षेत्र में अच्छी वर्षा होगी। इस पुर्वानुमान के प्रथम चरण के अन्तर्गत रथ यात्रा के बाद दिनांक 17 एवं 18 जुलाई 2021 को ग्राम सैन्दा‚ सियांग के आस-पास मुसलाधार वर्षा हुई है। खेतों में लबालब पानी भर आया है और लोग रोपनी का कार्य में लग गये ह